जिला संवाददाता मुकेश साहनी महाराजगंज।
महाराजगंज। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के एक छोटे से गाँव करमहवा बसंतपुर कोल्हुई थाना क्षेत्र के युवा ने वह कर दिखाया है, जो अच्छे-अच्छे अनुभवी पर्वतारोहियों के लिए भी एक चुनौती होता है। गजेंद्र तिवारी के पुत्र प्रणेश तिवारी ने नेपाल की ऊंचाइयों पर अपनी वीरता की ऐसी छाप छोड़ी है कि आज पूरा प्रदेश उन पर गर्व कर रहा है। प्रणेश ने बिना किसी प्रोफेशनल गाइड और बिना किसी बाहरी सहयोग सपोर्ट टीम के अकेले ही नेपाल के दुर्गम रास्तों पर 350 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। उन्होंने 5416 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे माउंटेन पास, ‘थोरांगला पास’ पर भारत का तिरंगा लहराया। महज 21 वर्ष की आयु में यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह उत्तर प्रदेश के सबसे युवा पर्वतारोही बन गए हैं।प्रणेश की यह यात्रा केवल थोरांगला पास तक सीमित नहीं थी। उन्होंने मात्र 15 दिनों के भीतर चार बेहद कठिन लक्ष्यों को पूरा कर पूरे भारत में एक नया रिकॉर्ड बनाया है ।विश्व का सबसे ऊंचा माउंटेन पास 5416 मीटर,माछापुछरे बेस कैंप 3700 मीटर और अन्नपूर्णा बेस कैंप 4130 मीटर।एक ही यात्रा में इन चारों दुर्गम स्थलों को फतह करने वाले वह देश के पहले युवा बन गए हैं। नेपाल से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर लौटने पर सावित्री मणि एकेडमी के हेड कोच करीम खान व नौतनवा विधानसभा के पूर्व विधायक श्री अमन मणि त्रिपाठी जी ने प्रणेश तिवारी का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने प्रणेश के साहस की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रतिभावान युवा ही आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।”मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। प्रणेश की यह सफलता यह साबित करती है कि अगर संकल्प मजबूत हो, तो उम्र और सुविधाएं कभी बाधा नहीं बनतीं। आज महाराजगंज का यह लाल पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का प्रतीक बन चुका है।


