एडीजी जोन ने जारी किए जिला-वार आंकड़े, कारणों की पहचान और रोकथाम के लिए समाज से की व्यापक अपील
दिनेश चंद्र मिश्र,गोरखपुर। गोरखपुर जोन में बढ़ती आत्महत्याओं को गंभीरता से लेते हुए अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) मुथा अशोक जैन ने सोमवार को जोन कार्यालय पर प्रेस वार्ता कर वर्ष 2021 से 2025 तक के पाँच वर्षीय आंकड़े जारी किए। उन्होंने बताया कि दहेज हत्या को छोड़कर आत्महत्याओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके पीछे परिवारिक विवाद, आर्थिक तनाव, मानसिक अवसाद जैसे कारण प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
एडीजी ने सभी जिलों के एसएसपी/एसपी को निर्देश दिया है कि आत्महत्याओं के कारणों का गहन विश्लेषण किया जाए। इसके लिए थानेवार विवरण, आयु-आधारित वर्गीकरण, विवाहित/अविवाहित स्थिति और घटना के कारणों की सटीक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। साथ ही जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी और समाज कल्याण विभाग के साथ संयुक्त बैठकों के माध्यम से जोन-स्तरीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति लागू की जाएगी।
जिलेवार पाँच वर्षीय
(2021–2025) आत्महत्या के आंकड़े
देवरिया 118, 134, 69, 69, 25 — 415
गोरखपुर 56, 80, 63, 41, 22 — 262
महाराजगंज 72, 89, 52, 46, 22 — 281
बस्ती 70, 93, 98, 90, 25 — 376
संतकबीरनगर 25, 38, 32, 38, 25 — 158
सिद्धार्थनगर 38, 55, 47, 41, 30 — 211
गोंडा 33, 59, 51, 45, 27 — 215
बलरामपुर 17, 32, 27, 30, 12 — 118
बहराइच 49, 62, 48, 65, 32 — 256
श्रावस्ती 33, 27, 21, 23, 16 — 120
कुल पाँच वर्षों में आत्महत्याओं की संख्या — 2,410 से अधिक
एडीजी ने बताया—इन कारणों से बढ़ रहीं आत्महत्याएँ
परिवारिक विवाद,आर्थिक संकट और कर्ज,मानसिक तनाव व अवसाद,बीमारी/लंबी बीमारी से उत्पन्न तनाव,सामाजिक दबाव
एडीजी ने कहा कि इन कारणों की गहराई से पहचान कर समय रहते हस्तक्षेप करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में छोटी समस्याएं भी बिना सही मार्गदर्शन के गंभीर निर्णय तक पहुँचा देती हैं।
एडीजी की व्यापक अपील — “संवाद और संवेदनशीलता ही समाधान
1. परिवारों से अपील,संवाद मजबूत करें
तनावग्रस्त व्यक्ति को सुने, डांटने के बजाय सहारा दें,विवादों को समय रहते सुलझाएँ,जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय व मनोवैज्ञानिक परामर्श लें
2. युवाओं से संदेश, असफलता जीवन का अंत नहीं, अवसर है, भावनात्मक निर्णय न लें
अपनी समस्याएँ साझा करें
भविष्य को सोचकर निर्णय लें
3. समाज से अपील
मानसिक स्वास्थ्य पर संवेदनशील बने अवसादग्रस्त व्यक्ति को सहयोग दें नकारात्मक टिप्पणियों और सामाजिक अपमान से बचें व्यवहार में बदलाव दिखे तो सतर्क रहें
4. प्रशासन और पुलिस के लिए निर्देश,हर जिले में थानेवार विश्लेषण
काउंसलिंग सेल को सक्रिय करना स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग के साथ संयुक्त रणनीति संकटग्रस्त परिवारों तक समय से पहुँचना
5. आर्थिक संकट झेल रहे लोगों के लिए अपील मदद मांगें, समस्या अकेले न झेलें,सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ लें
आर्थिक दबाव अस्थायी होता है, जीवन नहीं
एडीजी ने कहा—
“जीवन किसी भी समस्या से बड़ा है। परेशानियाँ अस्थायी होती हैं, लेकिन आपकी जिंदगी अनमोल है। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस है। समाज, परिवार, प्रशासन—सभी मिलकर आत्महत्या की घटनाओं को रोकने की दिशा में कार्य करें।
उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल कानून व्यवस्था की नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समर्थन और मानवीय संवेदना से जुड़ी है। उन्होंने जोन के नागरिकों से अपील की कि वे इस मुहिम में शामिल हों और किसी भी संकटग्रस्त व्यक्ति की समय से मदद करें।
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