आग जलाने व खाना बनाने के लिए लकड़ी बनी मुसीबत गरीबों के घर खानात पकाने में बड़ी मुसीबत
5 किलो राशन भी नहीं आ रही रास मकई का भुजा चबाकर गरीब बिता रहे हैं रात
कृष्णा यादव, तमकुही राज/ कुशीनगर। सोमवार की सुबह जब अंधेरे का चादर धीरे-धीरे हटाना शुरू हुआ। ठिठुरती ठंडक में धीरे-धीरे सूरज आसमान में दिखाई देने लगा लोग हर्षित हुए परंतु सुबह होते ही पछुआ हवा की झकोरो ने गलन और सिहरन बढ़ा दी। सड़कों पर सामान्य से भी कम आवागमन की आवाजाही ने ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों के सामने एक नई पहाड़ खड़ा कर दी जिन गरीबों के पास प्रधानमंत्री उजाला योजना के अंतर्गत रसोई गैस चूल्हा नहीं मिला है उनके घर आज भी आग जलाकर खाना बनाया जाता है।
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स्थानीय नगर पंचायत स्थित वार्ड नंबर 2 यशोधरा नगर में एक गरीब परिवार के महिला सदस्य का कहना है कि हमारे पति के मरने के बाद एक लड़का है जिसकी शादी हो गई है मेहनत मजदूरी करके घर का भोजन चलता है परंतु ठंडक के कारण कहीं काम नहीं मिलने की वजह से घर बैठा है 5 किलो राशन मिलने के बाद भी लकड़ी का प्रबंध नहीं होने की वजह से खाना नहीं बन पा रहा है मुसीबत यह है कि बगीचे से आम की पत्ती बटोर कर तथा इधर-उधर से सूखी लकड़ी चुनकर लाते हैं तो खाना बनता है।
परंतु इस ठंडक के कारण कहीं आने-जाने में दिक्कत हो रही है लकड़ी नहीं मिलने के कारण हमारे बच्चों को पका पकाया खाना नहीं मिल पा रहा है रात्रि को मकई की भुजा और नमक खाकर कभी-कभी गुजारा करना पड़ा है। सोमवार को निकली सूरज को देखकर सभी लोग आसान्वित है कि जाडा अब भागेगा परंतु पछुआ हवा के शिहरन में गरीबों की उम्मीद पर पानी फेर दिया है।
गरीब महिला का कहना है कि हमारे पति के देहांत हुए लगभग 6 वर्ष हो गया परंतु विधवा फॉर्म भरने के बाद भी भरण पोषण करने के लिए आज तक विधवा पेंशन की व्यवस्था नहीं हो पाई है और ना ही कोई दूसरा आमदनी का स्रोत है ऐसी स्थिति में परिवार के समक्ष जाड़े के दिन में बच्चों के लालन पालन एवं गर्म कपड़े की समस्या उत्पन्न हो गई है मेरा गरीब परिवार प्रकृति के इस चादर में एक छत के नीचे किसी तरह एक झोपड़ी में गुजर बसर कर रहा है किसी प्रकार की सहायता हमारे परिवार को नहीं मिली है।
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