मनीष तिवारी,सेवरही /कुशीनगर। नगर पंचायत सेवरही के माल गोदाम चौक निवासी व व्यवसायी संदीप मिश्रा ने एक बैठक के दौरान कहा कि मकर संक्रांति के पावन पर्व पर स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। इस अवसर पर संदीप मिश्रा ने पर्व के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मकर संक्रांति के दिन सभी छोटी-बड़ी नदियाँ गंगा के समान पुण्यदायिनी हो जाती हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को विधिवत स्नान अवश्य करना चाहिए।
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उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि संक्रांति के दिन स्नान न करने से व्यक्ति को सात जन्मों तक निर्धनता और रोगों का सामना करना पड़ता है, जबकि इस दिन स्नान करने से मनुष्य तेजस्वी, आरोग्यवान और पुण्यात्मा बनता है। फिर संदीप मिश्रा ने कहा कि मकर संक्रांति पर काले तिल का विशेष महत्व है। स्नान से पूर्व तिलयुक्त उबटन लगाना लाभकारी होता है। भगवान सूर्य को तिल मिश्रित जल से अर्घ्य देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। तिल का दान पापों का नाश करता है, तिल का सेवन स्वास्थ्यवर्धक होता है तथा तिल से किया गया हवन पुण्य प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि उत्तरायण के दिन किए गए सभी पुण्य कर्म अक्षय फल देते हैं। तिल-गुड़ के व्यंजन, चावल और चने की दाल से बनी खिचड़ी ऋतु परिवर्तन से होने वाले रोगों से रक्षा करती है। तिल मिश्रित जल से स्नान करने से शरीर को मौसम परिवर्तन के दुष्प्रभावों से लड़ने की शक्ति मिलती है। सूर्य उपासना से बढ़ता है ओज तथा तेज। संदीप मिश्रा ने पद्म पुराण का उल्लेख करते हुए सूर्यदेव के मूल मंत्र
“ॐ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः”
को अत्यंत प्रभावशाली बताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और आत्मशुद्धि की भावना से इस मंत्र का जाप करने से आत्मानंद और प्रभु-प्रेम की वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि सूर्य नमस्कार करने से ओज, तेज, बल और बुद्धि का विकास होता है। सूर्य को अर्घ्य, सूर्य स्नान और ध्यान से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। भ्रूमध्य में सूर्य ध्यान से बुद्धि प्रखर होती है, जबकि नाभि केंद्र में ध्यान करने से पाचन शक्ति बढ़ती है एवं उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
धूप का भी है विशेष स्वास्थ्य लाभ संदीप मिश्रा ने बताया कि सूर्य की धूप में 2 से 4 घंटे तक रखे गए घी, तेल और पानी अधिक सुपाच्य और रोगनाशक हो जाते हैं। कभी-कभी धूप में रखे पानी से स्नान करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील किया कि मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर स्नान-दान, तिल सेवन और सूर्य उपासना कर इस पर्व का पूर्ण पुण्य लाभ प्राप्त करें।
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