महिला हेल्प डेस्क से लेकर थाने के भीतर अभिलेख और कागजात को बचाने की कोशिश में आतिशबाजी कर बंदरों को भगाने के लिए आतिशबाजी कर कोतवाली पडरौना तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक ने बंदरों के झुंड को भगाया
खुर्शीद आलम सिद्दीकी,पडरौना/कुशीनगर। कोतवाली पडरौना परिसर में पुराने और नए भवन के छत के सहारे थाने परिसर में मंगलवार को देर शाम पहुंचे दर्जनों की संख्या में बंदरों की झुंड की घुड़की से लोग आधे घंटे तक दशहत में पुलिस के जवान रहे, लेकिन वन विभाग और नगर पालिका परिषद पडरौना का नकारापन भी सामने आ गया।
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महिला हेल्प डेस्क कोतवाली पडरौना परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बंदरों झुंड पहुंच गया। इसके बाद मानो यहां पुलिस से जुड़े जवान और महिला कांस्टेबल अगल-बगल के कमरों में घुस गए। इतना ही नहीं वे लोग बड़े भी दहशत में आ गए। इस समस्या से निपटने के लिए नगरपालिका परिषद पडरौना की प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
जैसे -तैसे यहां मौजूद वरिष्ठ उप निरीक्षक और रवि भूषण राय की अगुवाई में यहां मौजूद पुलिस के जवानों में शामिल पुरुष सिपाही महिला सिपाही व सहयोगी दरोगा ने मिलकर आतिशबाजी की जिससे मंदिरों का झुंड बाहर निकल सका। कोतवाली पडरौना में तैनात कुछ पुलिस वालों ने नाम न छापने के सर्त पर कहना था कि यह तो बंदर थे,अगर यहां तेंदुआ आ गया होता तो क्या होता?
पुलिस वालों को कहना था कि कोतवाली परिसर में दो दर्जन से अधिक पुलिस वालों का परिवार रहते हैं, जिनमें 20 से अधिक बच्चे हैं। मंगलवार को देर रात बंदर यहां थाने में तैनात पुलिस वालों के सरकारी आवास की सीढ़ियों पर बैठ गया। इससे आने-जाने का रास्ता रुक गया। वह एक कोने में बैठ गया, लेकिन जब भी उसके पास कोई जाने की कोशिश करता जून में बैठे बंदरों की टीम काटने के लिए दौड़ा लेते हैं।
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