मुकेश कुमार (क्राइम ऐडिटर चीफ) संभल (उत्तर प्रदेश)। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने संभल हिंसा से जुड़े एक मामले में एसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 20 अज्ञात पुलिस कर्मियों पर एफ.आई.आर. करने के आदेश जारी किए हैं। यह मामला संभल हिंसा के दौरान पुलिस की गोली से एक किशोर के घायल होने का है।
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मामला थाना नखासा क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय निवासी यामीन से जुड़ा है। यामीन ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को पापे (बिस्किट) बचने के लिए घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचते ही कथित तौर पर पुलिस ने उस पर गोली चला दी। आरोप है कि घायल होने के बाद बेटे ने पुलिस के डर से छुपकर इलाज कराया. इस सनसनीखेज आरोप के बाद यामीन ने न्यायालय की शरण ली और तत्कालीन सीओ संभाल अनुज चौधरी, संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित कई पुलिसकर्मियों को प्रतिवादी बनाया।
11 महीने बाद आया आदेश…………
यह मुकदमा 6 फरवरी 2025 को कोर्ट में दायर हुआ था. करीब 11 महीने के बाद 9 जनवरी 2026 को मामले की सुनवाई हुई और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी नामजद और अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश को पारित किया। मंगलवार देर शाम इस आदेश की जानकारी सामने आई। मामले में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि संभल हिंसा की पहले ही मजिस्ट्रियल जांच हो चुकी है। उसमें पुलिस कार्रवाई सही पाई गई थी। इसलिए मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की जाएगी।
चर्चा में रहे अनुज चौधरी…………
अनुज चौधरी वर्तमान में फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण है। जबकि अनुज तोमर संभल जनपद की कोतवाली चंदौसी के थाना प्रभारी हैं। संभल हिंसा के दौरान अनुज चौधरी सीओ संभल थे और बाद में प्रमोशन पाकर एएसपी बने। वे अपने “52 जुम्मे होली एक” वाले बयान को लेकर भी पहले ही सुर्खियों में रह चुके हैं।
2200 से अधिक को बनाया गया था आरोपीय………
बता दें कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में भीषण हिंसा भड़क उठी थी। पुलिस पर पथराव और फायरिंग भी हुई। जिसमें चार लोगों की मौत और 29 पुलिस कर्मियों के घायल होने की पुष्टि हुई थी। इस हिंसा के बाद 12 FIR दर्ज हुई और 2200 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया
गया। अब उसी हिंसा से जुड़े घटनाक्रम में पुलिस अधिकारियों पर FIR हुई है।
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सांसद वर्क बोले ऐतिहासिक फैसला………..
संभाल से सांसद जियाउरहमान बर्क ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, उन्होंने लिखा है कानून से ऊपर कोई नहीं, न वर्दी, न ओहदा। संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली मारने के मामले में तत्कालीन सीओ समेत 12 पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का सीजेएम कोर्ट का आदेश एक ऐतिहासिक फैसला है। यह आदेश साफ संदेश देता है कि अफसर हो या आम नागरिक कानून तोड़ने वाला बच नहीं सकता। संभल हिंसा में जिन अधिकारियों ने कानून की सीमा लांघी है अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है न्यायपालिका के जरिए इंसाफ जरूर मिलेगा। जुल्म के खिलाफ और हक के लिए लड़ते रहेंगे. इंसाफ देर से सही मगर मिलेगा जरूर।


