कृष्णा यादव,तमकुही राज/ कुशीनगर। रेलवे यात्रियों को सस्ती और पारदर्शी सुविधाएं देने के दावों के बीच हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। कुशीनगर एक्सप्रेस में IRCTC के तय रेट चार्ट को नजरअंदाज कर यात्रियों से खुलेआम ओवरचार्जिंग किए जाने का मामला सामने आया है। पानी से लेकर चाय तक, रोज़मर्रा की जरूरत की चीजें तय कीमत से कहीं ज्यादा दाम पर बेची जाती पाई गईं।
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ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सामने आया कि IRCTC के अनुसार 5 रुपये की स्टैंडर्ड चाय, ट्रेन में 10 रुपये में बेची जा रही थी। वहीं 14 रुपये की रेल नीर पानी की बोतल की जगह यात्रियों को लोकल कंपनी की बोतल 20 रुपये में दी जा रही थी। यह पूरा मामला गुप्त वीडियो रिकॉर्डिंग में साफ तौर पर कैमरे में कैद हुआ है।
जब वेंडर्स से तय दरों को लेकर सवाल किए गए, तो वे किसी भी तरह की जिम्मेदारी लेने से बचते नजर आए। रेट चार्ट दिखाने या बिल देने की मांग पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इससे साफ होता है कि चलती ट्रेन में खानपान व्यवस्था पर निगरानी बेहद कमजोर है और यात्री मजबूरी में ज्यादा कीमत चुकाने को मजबूर हैं।
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान यह भी देखा गया कि कैमरे के सामने सवाल उठने के बाद कुछ वेंडर्स के रवैये में बदलाव आया, लेकिन चाय जैसी वस्तुओं पर ओवरचार्जिंग जारी रही। यह स्थिति दर्शाती है कि नियमों का पालन स्थायी रूप से नहीं, बल्कि केवल दबाव पड़ने पर ही किया जाता है।
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रेलवे सफर के दौरान अधिकतर यात्री यह नहीं जानते कि किस वस्तु की क्या अधिकृत कीमत तय है। इसी जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर वेंडर्स मनमानी वसूली कर रहे हैं। कई यात्रियों का कहना है कि विरोध करने पर बहस या विवाद की स्थिति बन जाती है, इसलिए वे चुप रहना ही बेहतर समझते हैं।
पत्रकार आयुष सिंह द्वारा की गई इस एक्सपोज़िंग ग्राउंड रिपोर्टिंग ने कुशीनगर एक्सप्रेस में चल रही ओवरचार्जिंग और अनियमितताओं की सच्चाई को सामने ला दिया है। यह मामला सिर्फ कुछ रुपये की अतिरिक्त वसूली का नहीं, बल्कि यात्री अधिकारों और रेलवे की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।
अब सवाल यह है कि क्या इस खुलासे के बाद IRCTC और रेलवे प्रशासन ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर नियम एक बार फिर कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।


