शहर के चौमुखी विकास का बनेगा मार्गदर्शक मॉडल
दिनेश चंद्र मिश्र, गोरखपुर। जिले के बहुप्रतीक्षित विरासत गलियारा परियोजना को मूर्त रूप देने की दिशा में प्रशासन ने अब रफ्तार पकड़ ली है। एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने परियोजना के तहत आने वाली सभी संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को तेजी से निपटाने का निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही या विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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परियोजना के दायरे में आने वाली कुल 1666 संपत्तियों (मकान और जमीन) का बैनामा किया जाना है। इनमें से अब तक 1282 संपत्तियों की रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है, जबकि 384 मामलों में अभी प्रक्रिया शेष है। एसडीएम दीपक गुप्ता ने पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर, सदर तहसील के कानूनगो और संबंधित लेखपालों के साथ बैठक कर निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए ताकि परियोजना में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।
एसडीएम ने अधिकारियों को चेतावनी के स्वर में कहा कि “विरासत गलियारा गोरखपुर के चौमुखी विकास की रीढ़ है। इसमें देरी का मतलब है शहर के विकास को रोकना, जो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी शेष रजिस्ट्री जल्द से जल्द पूरी कर ली जाए, जिससे गलियारा परियोजना के निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य में कोई रुकावट न हो।
बैठक में एसडीएम ने यह भी कहा कि जिन संपत्तियों की रजिस्ट्री लंबित है, उनमें अधिकतर मामलों में मकान मालिक और किराएदार के बीच स्वामित्व विवाद आड़े आ रहे हैं। उन्होंने संबंधित लेखपालों और कानूनगों को सख्त निर्देश दिए कि ऐसे सभी विवादों का स्थानीय स्तर पर त्वरित निस्तारण किया जाए। “जमीन जिसके नाम पर है, मकान उसी का माना जाएगा। यदि कोई किरायेदार जानबूझकर अड़ंगा डाल रहा है तो उसे नियमानुसार समझाकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराई जाए,” उन्होंने कहा।
एसडीएम दीपक गुप्ता ने आगे बताया कि राज्य सरकार की नीति के अनुसार जमीन और मकान दोनों की रजिस्ट्री एक साथ होना अनिवार्य है, ताकि स्वामित्व के मामलों में पारदर्शिता बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
उन्होंने कहा कि विरासत गलियारा परियोजना न केवल गोरखपुर के सौंदर्यीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह शहर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को भी पुनर्जीवित करेगी। परियोजना पूरी होने के बाद यह गलियारा पर्यटन, रोजगार और शहरी विकास के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा।
तहसील प्रशासन ने अब इस दिशा में युद्धस्तर पर अभियान शुरू कर दिया है। सभी लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्र की लंबित संपत्तियों की रजिस्ट्री शीघ्र पूर्ण कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय को सौंपी जाएगी, ताकि कार्य की निगरानी सतत बनी रहे।
एसडीएम ने कहा, “विरासत गलियारा केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि गोरखपुर की पहचान और गौरव का प्रतीक बनेगा। इसलिए इसमें देरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तय है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि तहसील प्रशासन का उद्देश्य है कि सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से परियोजना को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए और गोरखपुर को एक आधुनिक, व्यवस्थित और सुंदर स्वरूप दिया जा सके।
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